पांच साल से यह परंपरा नहीं के बराबर थी लेकिन कोरोना महामारी के दौर में नियमों के बंधन के चलते यह अब खूब अपनाई आ रही है।from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/2BGHCsk
पांच साल से यह परंपरा नहीं के बराबर थी लेकिन कोरोना महामारी के दौर में नियमों के बंधन के चलते यह अब खूब अपनाई आ रही है।
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